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	<title>पुतिन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में यूएस भी शामिल Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>पुतिन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में यूएस भी शामिल, फिर बन सकता है दुश्‍मन नंबर वन</title>
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		<pubDate>Fri, 12 Feb 2021 07:28:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बीते कुछ माह से रूस में शुरू हुई राजनीति की जंग को लेकर दुनिया के कई देश बयानबाजी कर रहे हैं। वहां के विपक्षी नेता एलेक्‍सी नवलनी को सजा दिए जाने और उनके समर्थन में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को बल पूर्वक दबाने के लिए राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन की कड़ी आलोचना भी हो रही है।</p>
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<p>बीते कुछ माह से रूस में शुरू हुई राजनीति की जंग को लेकर दुनिया के कई देश बयानबाजी कर रहे हैं। वहां के विपक्षी नेता एलेक्&#x200d;सी नवलनी को सजा दिए जाने और उनके समर्थन में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को बल पूर्वक दबाने के लिए राष्&#x200d;ट्रपति व्&#x200d;लादिमीर पुतिन की कड़ी आलोचना भी हो रही है। ऐसे में दो सवाल बेहद खास हैं जिनका जवाब जानना जरूरी है। इनमें पहला सवाल है कि इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे की सच्&#x200d;चाई क्&#x200d;या है। दूसरा सवाल है कि क्&#x200d;या इन विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में बाहरी ताकतों का भी हाथ हो सकता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="540" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/ioplgyuik.jpg" alt="" class="wp-image-25242" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/ioplgyuik.jpg 650w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/ioplgyuik-300x249.jpg 300w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/ioplgyuik-150x125.jpg 150w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>क्&#x200d;या कहते हैं विशेषज्ञ&nbsp;</strong></p>



<p>इस बारे में जवाहललाल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और सेंटर फॉर रशियन एंड सेंट्रल एशियन स्&#x200d;टडीज की प्रमुख अर्चना उपाध्&#x200d;याय का साफतौर पर कहना है कि पुतिन के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को बाहरी देशों से हवा दी जा रही है। उन्&#x200d;हें इस बात की आशंका दिखाई देती है कि इन विरोध प्रदर्शनों को ये देश न सिर्फ हवा दे रहे हैं बल्कि कहीं न कहीं इसकी फंडिंग भी ये कर रहे हैं। उनके मुताबिक इसमें कहीं न कहीं अमेरिका भी शामिल हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्&#x200d;योंकि पुतिन को कहीं न कहीं ट्रंप समर्थक या प्रो-ट्रंप माना जाता था। 2016 के अमेरिकी राष्&#x200d;ट्रपति चुनाव में कहा जाता है कि रूसी हैकर्स की उन्&#x200d;हें जिताने में एक अहम भूमिका रही थी। वहीं अब डेमोक्रेट के आने के बाद माना जा रहा है कि रूस एक बार फिर से अमेरिका के लिए उसका दुश्&#x200d;मन नंबर वन बन कर उभर सकता है। इसलिए इस तरह के विरोध प्रदर्शनों हवा दी जा रही है।</p>



<p><strong>विरोध प्रदर्शनों में जो पश्चिमी देश शामिल&nbsp;</strong></p>



<p>प्रोफेसर उपाध्&#x200d;याय मानती हैं कि उनके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में जो पश्चिमी देश शामिल हैं उनमें भी इसको लेकर कहीं न कहीं मतभेद साफतौर पर उभर कर सामने आ रहे हैं। रूस का सबसे अधिकारी व्&#x200d;यापारिक साझेदारी वाला देश जर्मनी है। जर्मनी भी कई बार उनके खिलाफ बयानबाजी कर चुका है। इसके बाद भी बीते कुछ माह के दौरान दोनों के बीच साझेदारी और अधिक मजबूत हुई है। वहीं कुछ अन्&#x200d;य पश्चिमी देश जो इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए पुतिन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं और उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहे हैं वो भी पिछले दरवाजे से अपनी व्&#x200d;यापारिक साझेदारी को व्&#x200d;यक्तिगततौर पर मजबूती देने में लगे हैं। यूरोपीय संघ और रूस के बीच भी व्&#x200d;यापारिक साझेदारी काफी मजबूत है।</p>



<p><strong>रूस के लिए प्रतिबंध फायदे का सौदा&nbsp;</strong></p>



<p>जेएनयू प्रोफेसर के मुताबिक यदि यूरोपीय संघ रूस पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध लगाता है तो इसका उनको ही नुकसान होगा। बीते कुछ समय में जब से एलेक्&#x200d;सी नवलनी का मामला सामने आया है और पश्चिमी देशों ने रूस के प्रति कड़ा रुख अपनाया है, रूस से इस दौर को अपने फायदे में बखूबी किया है। इस दौरान रूस ने अपनी इनहाउस बिजनेस और मैन्&#x200d;यूफैक्&#x200d;चरिंग को बढ़ाया है। इतना ही नहीं वहां के व्&#x200d;यापारियों में अब ये बात उभरने लगी है कि ईयू का प्रतिबंध उनके लिए फायदे का सौदा हो सकता है। ऐसे में रूस भी ईयू की बयानबाजी की तरफ कोई ध्&#x200d;यान नहीं दे रहा है।</p>



<p><strong>नहीं पड़ेगा पुतिन पर कोई असर&nbsp;</strong></p>



<p>ये पूछे जाने पर कि इन विरोध प्रदर्शनों का क्&#x200d;या पुतिन की राजनीति और उनके भविष्&#x200d;य पर कोई असर पड़ेगा, तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि एलेक्&#x200d;सी नवलनी के चलते इस तरह के प्रदर्शन कई बार हो चुके हैं। उनका ये भी कहना है कि कुछ समय तक मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के बाद नवलनी अचानक लंबे समय के लिए गायब हो जाते हैं। जहां तक पुतिन की सत्&#x200d;ता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की बात है तो वहां का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है। वहां पर पुतिन के खिलाफ अवश्विास प्रस्&#x200d;ताव लाने का कोई नियम नहीं है। इसलिए जब तक वो राष्&#x200d;ट्रपति हैं और दोबारा चुनाव का समय नहीं आता है तब तक उनके ऊपर इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का कोई असर नहीं पड़ने वाला है।</p>



<p><strong>विपक्षी नेता एलेक्&#x200d;सी नवनली&nbsp;</strong></p>



<p>प्रोफेसर उपाध्&#x200d;याय का कहना है कि वर्ष 2012 के बाद जब पुतिन दोबारा सत्&#x200d;ता पर काबिज हुए थे तब से ही उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में तेजी देखने को मिली है। पिछले वर्ष अगस्&#x200d;त से इसमें और तेजी देखी गई है। उस वक्&#x200d;त इसकी शुरुआत रूस के प्रमुख विपक्षी नेता एलेक्&#x200d;सी नवलनी को जहर देने की घटना से हुई थी। उन्&#x200d;हें उस वक्&#x200d;त जहर दिया गया था जब वो साइबेरिया से वापस आ रहे थे। विमान में उनकी तबियत खराब होने के बाद उन्&#x200d;हें वहीं के ही एक स्&#x200d;थानीय अस्&#x200d;पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद बने अंतरराष्&#x200d;ट्रीय दबाव के चलते उन्&#x200d;हें विशेष विमान जर्मनी के चेरिटेबल अस्&#x200d;पताल में भर्ती कराया गया था। यहां पर करीब एक माह तक कोमा और फिर आईसीयू में रहने के बाद अब वो रूस वापस आने के बाद पुलिस की गिरफ्त में हैं और उन्&#x200d;हें तीन वर्ष की सजा का एलान किया गया है। इस बीच रूस में सड़कों पर उनके समर्थकों द्वारा उनकी रिहाई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ab-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6/">पुतिन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में यूएस भी शामिल, फिर बन सकता है दुश्‍मन नंबर वन</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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