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	<title>धूमधाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा गोपाष्टमी का पर्व Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>धूमधाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा गोपाष्टमी का पर्व, जानिए क्यों है इसकी इतनी मान्यता</title>
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		<pubDate>Thu, 11 Nov 2021 09:31:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>गोपाष्टमी का पर्व धूमधाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। गौशालाओं में लोग ने गो पूजा कर पुण्य की कामना की। इसके अलावा मंदिरों में प्रवचन कीर्तन के साथ भगवान कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह गो</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%a7%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5/">धूमधाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा गोपाष्टमी का पर्व, जानिए क्यों है इसकी इतनी मान्यता</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>गोपाष्टमी का पर्व धूमधाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। गौशालाओं में लोग ने गो पूजा कर पुण्य की कामना की। इसके अलावा मंदिरों में प्रवचन कीर्तन के साथ भगवान कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह गो पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित पर्व है। आचार्य बिजेंद्र प्रसाद ममगाईं के अनुसार इस दिन को लेकर कई मान्यता है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://choicetimes.org/wp-content/uploads/2021/11/gopashtami.jpg" alt="" class="wp-image-14132"/></figure></div>



<p>मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था। आठवें दिन इंद्र अपना घमंड त्यागकर श्रीकृष्ण के पास क्षमा मांगने आए। तभी से कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण व उनके भाई बलराम पहली बार गाय चराने के लिए गए थे।</p>



<p><strong>गोपाष्टमी पर इस तरह की पूजा</strong></p>



<p>गाय और उसके बछड़े को नहला-धुलाकर उसका श्रृंगार किया जाता है। गोमाता के चरण स्पर्श किये जाते हैं और उनकी सींग पर चुनरी बांधी जाती है। परिक्रमा कर उन्हें चराने के लिए बाहर ले जाया जाता है। इस दिन ग्वालों को तिलक लगाया जाता है और उन्हें दान भी दिया जाता है। गाय शाम को चर कर जब घर लौटे तो फिर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन अच्छा भोजन हरा चारा, गुड़ व हरा मटर खिलाया जाता है। जिन घरों में गाय नहीं होती है वो लोग गौशाला जाकर उनकी पूजा करते हैं, गंगाजल व फूल चढ़ाकर गुड़ भी खिलाते हैं। कुछ लोग इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और उनके भजन गाते हैं।</p>



<p><strong>देहरादून के पटेलनगर में कृष्ण भजनों पर झूमे</strong></p>



<p>गोपाष्टमी पर पटेलनगर स्थित श्याम सुंदर मंदिर में कथा की गई। आचार्य गिरीश गौड़ ने कहा कि आज ही के दिन भगवान कृष्ण ने गाय चराने शुरू किया था। इस दौरान कृष्ण भजनों पर भक्त झूमे। मीडिया प्रभारी भूपेंद्र चड्ढा ने कहा शुक्रवार को नवमी की प्रभात फेरी विशेष रूप से निकाली जाएगी। इससे पहले मंदिर से शुरू हुई प्रभात फेरी समिति के सह स्टोर इंचार्ज मनोज नागी ने धर्म ध्वज की पूजा कर किया। भजन गायकों तेजेंद्र हरजाई, गोविंद मोहन, प्रेम भाटिया, चंद्र मोहन आनंद, सुरेंद्र बागला, भूपेन्द्र चड्ढा ने सुंदर भजन सुनाए। इस मौके पर मंदिर समिति के प्रधान अवतार मुनियाल, गौरव कोहली, मनोज सूरी, यशपाल मग्गो, राजू गोलानी, गुलशन नंदा, योगेश आनंद, डाली रानी, महेंद्र भसीन,गोपी, वीरेंद्र डोभाल, किरण शर्मा,अलका अरोड़ा, श्यामा बक्शी, मिली नागी मौजूद रहे।</p>



<p><strong>इंद्रदेव अपना क्रोध त्याग कर श्री कृष्ण के पास आथे क्षमा मांगने</strong></p>



<p>डाक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन गोपाष्टमी पर्व मनाया जाता है। इस दिन गायों की पूजा और प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था और आंठवे दिन इंद्र देव अपना क्रोध त्याग कर श्री कृष्ण के पास क्षमा मांगने आए थे। तभी से कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है।</p>



<p>श्रीमद्भागवत गीता में बताया गया है कि जब देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया था, तो उसमें कामधेनु गाय निकली थी। जिसे ऋषियों ने अपने पास रख लिया था, क्योंकि वे पवित्र थी। मान्यता है कि उसके बाद से ही अन्य गायों की उत्पत्ति हुई। इतना ही नहीं, महाभारत में बताया गया है कि गाय के गोबर और मूत्र में देवी लक्ष्मी का निवास होता है। इसलिए ही दोनों ही चीजों का उपयोग शुभ काम में किया जाता है।</p>
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