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	<title>जानिए Archives - Ad Event Media</title>
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	<title>जानिए Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>जानिए, माघ माह के पहले प्रदोष व्रत की तारीख</title>
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		<pubDate>Sat, 22 Jan 2022 04:25:56 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[माघ माह के पहले प्रदोष व्रत की तारीख]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इस प्रकार माघ माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का प्रदोष व्रत 30 जनवरी को है। इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। सप्ताह के सातों दिनों को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को नाम से पुकारा</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%98-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6/">जानिए, माघ माह के पहले प्रदोष व्रत की तारीख</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इस प्रकार माघ माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का प्रदोष व्रत 30 जनवरी को है। इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। सप्ताह के सातों दिनों को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को नाम से पुकारा जाता है। माघ माह का पहला प्रदोष व्रत रविवार को पड़ रहा है। अत: यह रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा। शास्त्रों और पुराणों में निहित है कि रवि वार का प्रदोष व्रत करने से आरोग्य जीवन व्यतीत करता है। साथ ही व्रती दीर्घायु एवं प्रसन्न चित्त रहता है। अतः व्यक्ति विशेष को भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा पूर्वक भक्ति कर प्रदोष व्रत करना चाहिए। आइए, प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत महत्व जानते हैं-</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://nextindiatimes.com/wp-content/uploads/2022/01/pradosh.jpg" alt="" class="wp-image-16756" width="676" height="507"/></figure></div>



<p><strong>प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>हिंदी पंचांग के अनुसार, माघ माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 29 जनवरी को रात्रि में 8 बजकर 37 मिनट पर शुरु होकर 30 जनवरी को दोपहर में 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। रवि प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त संध्याकाल में 5 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर रात्रि में 8 बजकर 37 मिनट तक है। व्रती संध्याकाल में भगवान शिव जी एवं माता पार्वती की पूजा-उपासना कर सकते हैं।</p>



<p><strong>प्रदोष व्रत पूजा विधि</strong></p>



<p>इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शिवजी को स्मरण और प्रणाम कर दिन की शुरुआत करें। नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें। इसके पश्चचात, अंजिल में गंगाजल रख आमचन कर अपने आप को शुद्ध और पवित्र करें। फिर श्वेत और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सबसे पहले भगवान सूर्य को जल का अर्घ्य दें। फिर भगवान शिव जी एवं माता पार्वती की पूजा फल, फूल, धूप, दीप, अक्षत, भांग, धतूरा, दूध,दही और पंचामृत से करें। पूजा करते समय शिव चालीसा का पाठ, मंत्रों का जाप अवश्य करें। अंत में आरती अर्चना कर भगवान शिव और माता पार्वती से अन्न, जल और धन की कामना करें। दिनभर उपवास रखें। शाम में आरती अर्चना करें। फिर फलाहार करें। अगले दिन पूजा-पाठ संपन्न कर व्रत खोलें।</p>
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		<title>जानिए, क्षमा कर देने के बाद भी भगवान कृष्ण को क्यों करना पड़ा था शिशुपाल का वध</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Jan 2022 04:14:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[क्षमा कर देने के बाद भी भगवान कृष्ण को क्यों करना पड़ा था शिशुपाल का वध]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाभारत काव्य की रचना वेदव्यास ने की है। इस काव्य ग्रंथ में महाभारतकाल की सभी कथा निहित है। इनमें एक कथा शिशुपाल वध की भी है। आज भी सतसंग और श्रीमद भागवत कथा के दौरान शिशुपाल वध के बारे में विस्तार से बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत समकालीन चेदि जनपद के लोग</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6/">जानिए, क्षमा कर देने के बाद भी भगवान कृष्ण को क्यों करना पड़ा था शिशुपाल का वध</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>महाभारत काव्य की रचना वेदव्यास ने की है। इस काव्य ग्रंथ में महाभारतकाल की सभी कथा निहित है। इनमें एक कथा शिशुपाल वध की भी है। आज भी सतसंग और श्रीमद भागवत कथा के दौरान शिशुपाल वध के बारे में विस्तार से बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत समकालीन चेदि जनपद के लोग संतोषी और साधु थे। उस जनपद में उपहास के दौरान भी कोई व्यक्ति झूठ नहीं बोलता था। इस जनपद का स्वामी शिशुपाल था। वहीं, रिश्ते में शिशुपाल वासुदेव की बहन का पुत्र था। इस रिश्ते से शिशुपाल और भगवान श्रीकृष्ण फुफेरे भाई थे। लेकिन क्या आपको पता है कि सौ बार क्षमा कर देने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण को शिशुपाल का वध क्यों करना पड़ा था? आइए जानते हैं-</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" src="https://nextindiatimes.com/wp-content/uploads/2022/01/god-krishna.jpg" alt="" class="wp-image-15529"/></figure></div>



<p><strong>क्या है कथा</strong></p>



<p>किदवंती है कि वासुदेव की बहन के गर्भ से शिशुपाल का जन्म हुआ था। जब उसका जन्म हुआ, तो वह बेहद विचित्र दिख रहा था। उस समय शिशुपाल की तीन आंखे और चार हाथ थे। यह देख चेदि के राजा दमघोष और उनकी पत्नी चिंतित हो उठे। उस समय उन्होंने शिशुपाल को किसी आश्रम में छोड़ने की बात सोची। तभी आकाशवाणी हुई, जिसमें कहा गया कि अतिरिक्त अंग को देख शिशु का त्याग न करें, बल्कि शिशु को ग्रहण करें। उचित समय में शिशु के अतिरिक्त अंग विलुप्त हो जाएंगे। हालांकि, जिसकी गोद में बैठने से अंग गायब होंगे। उस व्यक्ति के हाथ से शिशु का वध होगा।</p>



<p>कालांतर में शिशु के माता-पिता ने शिशु का पालन-पोषण किया। कालांतर में एक दिन शिशुपाल आंगन में खेल रहा था। उसी भगवान श्रीकृष्ण की नजर शिशुपाल पड़ी। उस समय शिशु की शरारत को देख भगवान के मन में स्नेह और करुणा जगी। तभी उन्होंने शिशु को गोद में ले लिया। तभी बड़ा चमत्कार हुआ और शिशु की अतिरिक्त आंख और हाथ गायब हो गए। उसी समय शिशु के माता-पिता को आकाशवाणी की याद आई। हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण से शिशु की गलती को क्षमा करने का वचन मांगा।</p>



<p>भगवान श्रीकृष्ण ने कहा-बुआ! शिशु के सौ गलती क्षमा है। आप चिंतित न हो। कालांतर में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी प्रेम प्रसंग में थे। वहीं, शिशुपाल भी रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था। जब भगवान श्रीकृष्ण की शादी रुक्मिणी से हो गई, तो शिशुपाल अपमान समझ श्रीकृष्ण को दुश्मन मानने लगे। आगे चलकर धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा आयोजित राजसूय यज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण का मान-सम्मान देखकर शिशुपाल ईष्या करने लगे और भगवान श्रीकृष्ण को अपमानित करने लगे। सौ बार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को क्षमा दे दी। जब शिशुपाल ने 101 बार भगवान का अपमान किया, तो श्रीकृष्ण जी ने सुदर्शन निकालकर शिशुपाल का वध कर दिया।</p>
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		<item>
		<title>जानिए, देवोत्थान एकादशी व्रत क्या है विशेष महत्व?तिथि और शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Nov 2021 04:46:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए]]></category>
		<category><![CDATA[देवोत्थान एकादशी व्रत क्या है विशेष महत्व?तिथि और शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउत्थान एकादशी कहा जाता है। इसे देव प्रबोधिनी या देव उठावनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। सभी एकादशियों के व्रत में देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। जिनका शयन काल</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b5/">जानिए, देवोत्थान एकादशी व्रत क्या है विशेष महत्व?तिथि और शुभ मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>  <p>कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउत्थान एकादशी कहा जाता है। इसे देव प्रबोधिनी या देव उठावनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। सभी एकादशियों के व्रत में देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। जिनका शयन काल देवउठानी एकादशी के दिन समाप्त होता है। देवउठानी एकादशी पर माता तुलसी और भगवान शालिग्राम के विवाह का विधान है। इसके बाद से चतुर्मास से रूके हुए विवाह आदि के मांगलिक कार्यक्रमों की शुरूआत हो जाती है। इस वर्ष देवउठानी एकादशी 14 नवंबर, रविवार के दिन पड़ रही है। आइये जानते हैं कि देवउठानी एकादशी का महत्त्व और इस बार इस एकादशी का शुभ मुहूर्त के बारे में&#8230;.</p>   <div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://choicetimes.org/wp-content/uploads/2021/11/bhagwan_vishnu.jpg" alt="" class="wp-image-14075"></figure></div>   <p><strong>देव उठानी एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त</strong></p>   <p>हिंदी पंचांग के अनुसार चातुर्मास का आरंभ इस वर्ष 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन हुआ था। जिसका समापन 14 नवंबर को देवउठानी एकादशी के दिन होगा। एकादशी तिथि 14 नवंबर को सुबह 05:48 बजे से शुरू हो कर 15 नवंबर को सुबह 06:39 बजे समाप्त होगी। एकादशी तिथि का सूर्योदय 14 नवंबर को होने के कारण देवात्थान एकादशी का व्रत और पूजन इसी दिन होगा।</p>   <p><strong>देवउठानी एकादशी का महत्व</strong></p>   <p>सनातन धर्म में देवउठानी एकादशी को सभी एकादशी तिथियों में विशेष माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त हो जाता है। विवाह आदि शुभ और मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। एकादशी व्रत के बारे में स्कंद पुराण और महाभारत में भी वर्णन है। इसके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया था। मान्यता है कि ये व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला और सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला व्रत है। इस दिन या इस दिन से कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है।</p>  </p>
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		<title>चैत्र नवरात्रि अष्टमी पूजा कब मनाई जाएँगी, जानिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Apr 2021 06:17:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[चैत्र नवरात्रि अष्टमी पूजा कब मनाई जाएँगी]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नवरात्रि की अष्टमी को आठम या अठमी भी कहते हैं। नवरात्रि की अष्टमी को महाष्टमी या दुर्गाष्टमी कहते हैं जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इस दिन माता के आठवें रूप महागौरी की पूजा और आराधना की जाती है। कलावती नाम की यह तिथि जया संज्ञक है। मंगलवार की अष्टमी सिद्धिदा और बुधवार की</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>नवरात्रि की अष्टमी को आठम या अठमी भी कहते हैं। नवरात्रि की अष्टमी को महाष्टमी या दुर्गाष्टमी कहते हैं जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इस दिन माता के आठवें रूप महागौरी की पूजा और आराधना की जाती है। कलावती नाम की यह तिथि जया संज्ञक है। मंगलवार की अष्टमी सिद्धिदा और बुधवार की मृत्युदा होती है। इसकी दिशा ईशान है। ईशान में शिव सहित सभी देवताओं का निवास है इसीलिए इस अष्टमी का महत्व अधिक है। यह तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र, सुख को देने वाली और धर्म की वृद्धि करने वाली है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="540" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xcfxd.jpg" alt="" class="wp-image-31955" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xcfxd.jpg 650w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xcfxd-300x249.jpg 300w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xcfxd-150x125.jpg 150w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस बार चैत्र नवरात्रि में महाष्टमी 20 अप्रैल 2021 मंगलवार को पड़ रही है। इसके दूसरे दिन रामनवमी रहेगी।नवरात्रि के 8वें दिन की देवी मां महागौरी हैं। मां गौरी का वाहन बैल और उनका शस्त्र त्रिशूल है। परम कृपालु मां महागौरी कठिन तपस्या कर गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से संपूर्ण विश्व में विख्यात हुईं। भगवती महागौरी की आराधना सभी मनोवांछित कामना को पूर्ण करने वाली और भक्तों को अभय, रूप व सौंदर्य प्रदान करने वाली है अर्थात शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के विष व्याधियों का अंत कर जीवन को सुख-समृद्धि व आरोग्यता से पूर्ण करती हैं। अष्टमी के दिन कुल देवी की पूजा के साथ ही मां काली, दक्षिण काली, भद्रकाली और महाकाली की भी आराधना की जाती है।अधिकतर घरों में अष्टमी की पूजा होती है। </p>



<p>यदि अष्टमी को पराण कर रहे हैं तो विविध प्रकार से महागौरी का पूजन कर भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए विविध प्रकार से पूजा-हवन कर 9 कन्याओं को भोजन खिलाना चाहिए और हलुआ आदि प्रसाद वितरित करना चाहिए। माता को अर्पित करें ये- 1.खीर, 2.मालपुए, 3.मीठा हलुआ, 4.पूरणपोळी, 5.केले, 6.नारियल, 7.मिष्ठान्न, 8.घेवर, 9.घी-शहद और 10.तिल और गुड़। देव, दानव, राक्षस, गंधर्व, नाग, यक्ष, किन्नर, मनुष्य आदि सभी अष्टमी और नवमी को ही पूजते हैं। कथाओं के अनुसार इसी तिथि को मां ने चंड-मुंड राक्षसों का संहार किया था। नवरात्रि में महाष्टमी का व्रत रखने का खास महत्व है। मान्यता अनुसार इस दिन निर्जला व्रत रखने से बच्चे दीर्घायु होते हैं। अष्टमी के दिन सुहागन औरतें अपने अचल सुहाग के लिए मां गौरी को लाल चुनरी जरूर चढ़ाती हैं। </p>
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		<title>कोरोना वैक्सीन का केंद्र हुआ बंद, निराश वापस लौट रहे नागरिक आपके राज्य में वैक्सीन है या नहीं, जानिए</title>
		<link>https://adeventmedia.com/corona-vaccine-center-closed-citizens-returning-disappointed-know-whether-there-is-a-vaccine-in-your-state/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Apr 2021 07:36:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[कोरोना वैक्सीन का केंद्र हुआ बंद]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए]]></category>
		<category><![CDATA[निराश वापस लौट रहे नागरिक आपके राज्य में वैक्सीन है या नहीं]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश में हर दिन के साथ कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वहीं, कोरोना को हराने में सबसे बड़ा हथियार वैक्सीन को लेकर देश में भय का माहौल है। काफी सारे टीकाकरण स्थानों पर लिख दिया गया है कि यहां वैक्सीन मौजूद नहीं है। इस कारण नागरिकों को मायूस होकर लौटना पड़</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/corona-vaccine-center-closed-citizens-returning-disappointed-know-whether-there-is-a-vaccine-in-your-state/">कोरोना वैक्सीन का केंद्र हुआ बंद, निराश वापस लौट रहे नागरिक आपके राज्य में वैक्सीन है या नहीं, जानिए</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>देश में हर दिन के साथ कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वहीं, कोरोना को हराने में सबसे बड़ा हथियार वैक्सीन को लेकर देश में भय का माहौल है। काफी सारे टीकाकरण स्थानों पर लिख दिया गया है कि यहां वैक्सीन मौजूद नहीं है। इस कारण नागरिकों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। हाल ही में महाराष्ट्र से निकली वैक्सीन और भेदभाव की आवाज बाकी अन्य राज्यों तक भी पहुंची और अब कई राज्यों यहां तक कि भाजपा शासित राज्यों के अस्पतालों में भी वैक्सीन कुछ ही दिनों की रह गई है। हालांकि, सरकार कह रही है कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है और राज्यों को समय समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। आइय देखते हैं कि क्या हाल है देश में वैक्सीन का&#8230;</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="540" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xsc.jpg" alt="" class="wp-image-31116" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xsc.jpg 650w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xsc-300x249.jpg 300w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/04/xsc-150x125.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>छत्तीसगढ़ में 2 दिनों का स्टॉक</strong></p>



<p>सीएम भूपेश बघेल बोले, &#8216;छत्तीसगढ़ में अब तक 35.83 लाख वैक्सीन खुराक प्राप्त हुई है। वर्तमान में, हमारे पास 4.83 लाख खुराक का स्टॉक है जो 2 दिनों तक चल सकता है। हमने केंद्र सरकार से 7 दिनों के लिए वैक्सीन खुराक प्रदान करने का अनुरोध किया है ताकि टीकाकरण अभियान सुचारू रूप से चलता रहे।&#8217;</p>



<p><strong>ओडिशा में भी दो दिन का स्टॉक</strong></p>



<p>बिजय पाणिग्रही (ओडिशा में COVID-19 टीकाकरण प्रभारी) बोले, &#8216;हमारे पास कोविशिल्ड की 3.2 लाख खुराक और कोवैक्सिन की 1 लाख खुराक हैं। इस स्टॉक के साथ, हम 2 दिनों के लिए टीकाकरण जारी रख सकते हैं। हम भारत सरकार से 2 दिनों के भीतर टीके प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं।&#8217;</p>



<p>वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के संचालन के लिए केन्द्र से और 300 करोड़ रुपये की मांग की है। मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में पीएम मोदी से पटनायक ने टीकाकरण कार्यक्रम के लिए 300 करोड़ रुपये की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि ओड़िशा ने टीकाकरण संचालन के लिए केन्द्र से 400 करोड़ रुपये मांगा था। मगर केन्द्र सरकार ने मात्र 146 करोड़ रुपये दिया था। कोरोना संचालन के लिए कम से कम और 300 करोड़ रुपये देने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मांग की है। इसके साथ ही एसडीएरएफ कोष से 50 प्रतिशत राशि खर्च करने की भी अनुमति मांगी है।</p>



<p><strong>राजस्थान सीएम अशोक गहलोत का पीएम मोदी को पत्र</strong></p>



<p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि राजस्थान में वैक्सीनेशन का स्टॉक खत्म हो रहा है। अब केवल दो दिन का स्टॉक बचा है। उन्होंने पीएम से 30 लाख वैक्सीन उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने कहा कि सात अप्रैल तक यहां 86 लाख 89 हजार 770 वैक्सीन की डोज अब तक लगाई जा चुकी है। पीएम द्वारा 11 से 14 अप्रैल तक टीक उत्सव चलाने की घोषणा का स्वागत करते हुए गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कोरोना संक्रमण से बचाव के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।</p>



<p>उन्होंने कहा कि टीकाकरण में कोई राजनीति नहीं है लेकिन तथ्य यह स्पष्ट करते हैं कि कई राज्यों में टीकों की कमी है। केंद्रीय सरकार को वैक्सीन खुराक की स्थिति को सार्वजनिक करना चाहिए।</p>



<p><strong>आंध्र प्रदेश के सीएम ने भी लिखा पीएम को पत्र</strong></p>



<p>आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 11 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच आयोजित होने वाले &#8216;टीका उत्सव&#8217; के लिए COVID वैक्सीन की 25 लाख खुराक की आपूर्ति का अनुरोध किया है।</p>



<p><strong>महाराष्ट्र पर नजर</strong></p>



<p>महाराष्ट्र में वैक्सीन की कमी पर चल रही बहस के बीच बताया गया कि अब बृहन्मुंबई नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में सभी निजी कोविड -19 टीकाकरण केंद्र 12 अप्रैल तक बंद रहेंगे। हालांकि, सरकारी और नगरपालिका अस्पताल, टीकाकरण जारी रहेंगे। नागरिक निकाय ने कहा, हालांकि सप्ताहांत लॉक होने के कारण समय को संशोधित किया गया है। नागरिक प्राधिकरण ने सूचित किया कि लोगों को टीकाकरण के लिए यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी। शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे के बीच टीकाकरण किया जाएगा। रविवार को समय सुबह 9 से शाम 5 बजे के बीच होगा।</p>



<p>नागरिक निकाय ने कहा, &#8216;प्रिय मुंबईवासी टीकाकरण केंद्रों में से कुछ भारत सरकार की तरफ से वैक्सीन की प्राप्ति नहीं होने के कारण टीकों की कमी है, लेकिन सभी केंद्रों को जल्द ही टीकाकरण करना चाहिए। हमें असुविधा पर पछतावा है और हम आपको अपडेट करते रहेंगे।&#8217;</p>



<p>बता दें कि वैक्सीन की खुराक की कमी के कारण निजी सुविधाओं में 71 सहित कुछ 90 टीकाकरण केंद्रों को शुक्रवार को बंद करना पड़ा। बुधवार को, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में वैक्सीन की कमी का मुद्दा उठाया, जो देश में बड़ा मुद्दा बन गया। इसपर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि राज्य महामारी के प्रबंधन में अपनी विफलता को कवर करने के लिए केंद्र को दोषी ठहरा रही है।</p>



<p>बीते दिन खबर मिली थी कि पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) ने खुराक की कमी के कारण शुक्रवार को अपनी सीमा में सभी टीकाकरण केंद्रों को बंद रखने का फैसला किया है।</p>



<p><strong>दिल्ली में कोरोना वैक्सीन की कमी</strong></p>



<p>राजधानी दिल्ली में भी वैक्सीन स्टॉक की कमी का दावा किया गया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में भी अब 4 से 5 दिन का वैक्सीन स्टॉक बचा हुआ है। सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों में टीका लगाने की रफ्तार धीमी है। केंद्र के अस्पतालों में सिर्फ 30 से 40 फीसदी वैक्सीन लगाई गई है। इसी वजह से दिल्ली में आंकड़े कम दिख रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि यह वक्त राजनीति करने का नहीं है बल्कि एक साथ मिलकर कोरोना के खिलाफ लड़ने का है।&nbsp;</p>



<p><strong>झारखंड पहुंची 10 लाख डोज</strong></p>



<p>झारखंड को 10,23,800 कोविशील्ड की डोज मिल गई है। शुक्रवार को रांची एयरपोर्ट पर खेप पहुंचने के बाद नामकुम स्थित वेयर हाउस से टीके जिलों को भेजा जा रहा है। एक दिन पहले कोवैक्सीन की दो लाख डोज झारखंड को मिली थी। दस लाख अन्य डोज मिलने से राज्य में टीके की किल्लत फिलहाल दूर हो गई है। इससे पहले रांची के कई वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन खत्म होने के कारण लोग बिना वैक्सीनेशन वापस लौट रहे थे। सदर अस्पताल में सुबह 10 बजे से ही वैक्सीन खत्म हो गई थी। हालांकि वैक्सीन के आते ही विभिन्न वैक्सीनेशन सेंटरों में इसकी सप्लाई की गई। जिससे दोबारा लोगों को टीका लगाना प्रारंभ हो गया।</p>



<p><strong>बिहार सरकार ने केंद्र से मांगे कोरोना के टीके</strong></p>



<p>कोरोना के खिलाफ जारी जंग में वैक्सीन की कमी एक बड़ी समस्या बन रही है। भले ही सरकार का दावा हो कि राज्य में वैक्सीन की कमी नहीं, बावजूद जिलों से आ रही रिपोर्ट बताती हैं कि कुछ जिलों में वैक्सीन की कमी होने की वजह से टीकाकरण का काम बाधित हो रहा है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि रविवार से जिलों में वैक्सीन की कमी नहीं होगी। क्योंकि राज्य सरकार की मांग के बाद शुक्रवार को बिहार को कोविशील्ड की नौ लाख डोज मुहैया करा दी गई हैं। इस बीच राज्य सरकार ने 15 लाख अतिरिक्त कोरोना वैक्सीन के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। दूसरी तरफ बिहार में स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्&#x200d;यय अमृत ने कहा है कि वैक्&#x200d;सीन की कोई कमी नहीं है।</p>



<p><strong>हिमाचल में 11 से 14 अप्रैल तक मनाया जाएगा टीका उत्सव</strong></p>



<p>टीकाकरण को जन आंदोलन बनाने के लिए 11 से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। सूक्ष्म नियंत्रण क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी के साथ-साथ परीक्षण, ट्रेसिंग और उपचार के लिए दोहरी रणनीति को अपनाया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कोरोना मामलों की स्थिति की समीक्षा के लिए वर्चुअल माध्यम से उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों व चिकित्सा अधीक्षकों के साथ बैठक में कही।</p>



<p><strong>उत्तरप्रदेश में न रेमडेसिविर न पर्याप्त स्टाफ, वैक्सीन भी सीमित</strong></p>



<p>देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश के कई राज्यों में वैक्सीन नहीं है। लोगों को उदास वापस लौटना पड़ रहा है। यहां रेमडेसिविर दवा व पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण भी चिंता बढ़ी है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ से कोरोना के कारण बिगड़ते हालात को लेकर बात की। राजनाथ ने सीएम योगी से बेड बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की। बड़ी बात यह है कि राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा और गाजियाबाद में भी अब वैक्सीन का स्टॉक घट रहा है। हालांकि, सरकार दावा कर रही है कि राज्य में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। बता दें कि रेमडेसिविर दवा की कमी कई राज्यों में बताई जा रही है।</p>



<p><strong>राहुल गांधी ने पीएम को क्या लिखा?</strong></p>



<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल कोविड-19 की वैक्सीन का निर्यात रोकने की मांग की है। साथ ही कहा कि देश में हर किसी को टीका लगना चाहिए, जिसे इसकी जरूरत है। साथ ही राहुल ने राज्य सरकारों को और वैक्सीन हासिल करने और उनके वितरण का अधिकार देने की भी जरूरत बताई है।</p>



<p><strong>अब तक कितनों को लगा टीका</strong></p>



<p>जनवरी माह से शुरू किए गए वैक्सीनेशन के अभियान के तहत अब तक देश में कुल 9,80,75,160 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है। हालांकि, कई राज्यों से वैक्सीन की मांग की गई है। इनका कहना है कि वैक्सीन की कमी के कारण वैक्सीनेशन सेंटरों को बंद करने की नौबत आ गई है और साथ ही साथ कहा है कि जब तक वैक्सीन नहीं होंगी तो कैसे टीकाकरण अभियान को तेज कर पाएंगे।</p>



<p><strong>शनिवार को रिकॉर्ड तोड़ मामले</strong></p>



<p>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी होने वाले आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में आने वाले नए मामलों की संख्या आज भी सवा लाख से अधिक है। इसके अनुसार, पिछले 24 घंटों में भारत में COVID-19 के 1,45,384 नए मामले आए और 794 संक्रमितों की मौत हो गई। इसके बाद देश में अब तक कुल संक्रमितों का आंकड़ा 1,32,05,926 हो गया और मरने वालों की संख्या 1,68,436 हो गई है। संक्रमित देशों में भारत तीसरे नंबर पर है। पहला नंबर अमेरिका का है और दूसरा ब्राजील का।</p>
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