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	<title>जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि Archives - Ad Event Media</title>
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	<title>जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>रखा है वट सावित्री व्रत ,तो सुहागिन महिलाएं बिल्कुल भी न करें गलतियां,जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
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		<pubDate>Mon, 30 May 2022 04:43:11 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[रखा है वट सावित्री व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। आज सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रख रही हैं। हिंदू धर्म में हर एक तीज त्योहार के अपने-अपने नियम है। इसी तरह वट सावित्री व्रत के भी कुछ नियम है जिनका पालन</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b5%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/">रखा है वट सावित्री व्रत ,तो सुहागिन महिलाएं बिल्कुल भी न करें गलतियां,जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। आज सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रख रही हैं। हिंदू धर्म में हर एक तीज त्योहार के अपने-अपने नियम है। इसी तरह वट सावित्री व्रत के भी कुछ नियम है जिनका पालन जरूर करना चाहिए। जानिए वट सावित्री व्रत के दौरान किन गलतियों को करने से बचें।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://theblat.in/wp-content/uploads/2022/05/vat-savitri-11-300x249.jpg" alt="" class="wp-image-39384" width="718" height="596"/></figure></div>



<p><strong>वट सावित्री व्रत रखते समय न करें ये गलतियां</strong></p>



<ul class="wp-block-list"><li>माना जाता है कि वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को लाल, पीले, हरे जैसे कपड़े पहनना चाहिए। नीले, काले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।</li><li>सुहागिन महिलाओं को वट सावित्री व्रत की पूजा के दौरान नीली, काले रंग की चूड़ियां या फिर बिंदी लगाने से बचना चाहिए।</li><li>जो महिला पहली बार व्रत कर रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि पहला व्रत मायके में करना चाहिए। ससुराल से इस व्रत की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है।</li><li>जो महिला पहली बार व्रत रख रही हैं उसे वट सावित्री वन्रच ते दिन पूजा संबंधी सभी समाना मायके के द्नारा दिए गए ही इस्तेमाल करना चाहिए।</li><li>अगर किसी महिला को वट सावित्री व्रत के दिन मासिक धर्म हैं तो वह खुद पूजा न करके दूसरी महिला से पूजा करा लें और पूजा स्थल से दूर बैठकर कथा सुनें।</li><li>वट सावित्री व्रत के दौरान घी और तेल का दीरपक जलाया जाता है। जिन्हें सही दिशा में रखना बेहद जरूरी है। अगर आप घी का दीपक जला रही हैं तो इसे हमेशा दाएं ओर ही रखें और तेल का दीपक जला रही हैं तो बाएं ओर रखना चाहिए।</li><li>पूजा सामग्री को हमेशा बाईं ओर रखना चाहिए। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।</li><li><strong>वट सावित्री व्रत का मुहूर्तज्येष्ठ अमावस्या तिथि प्रारंभ:</strong></li><li> 29 मई को दोपहर 02 बजकर 54 मिनट से शुरू</li><li><strong>अमावस्या तिथि का समापन: </strong>30 मई को शाम 04 बजकर 59 मिनट पर</li><li><strong>अभिजीत मुहूर्त &#8211;</strong> सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से</li><li><strong>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; </strong>सुबह 04 बजकर 08 मिनट से 04 बजकर 56 मिनट से </li><li><strong>सर्वार्थ सिद्धि योग- </strong>सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 31 मई सुबह 05 बजकर 24 मिनट तक</li><li><strong>वट सावित्री व्रत की पूजा विधि</strong><ul><li>ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान आदि करके सुहागिन महिलाएं साफ वस्त्र धारण करने के साथ सोलह श्रृंगार कर लें। आप चाहे को लाल रंग के वस्त्र धारण करें तो यह शुभ होगा।</li><li>बरगद के पेड़ के नीचे जाकर गाय के गोबर से सावित्री और माता पार्वती की मूर्ति बना लें।</li><li>अगर गोबर उपलब्ध नहीं है तो दो सुपारी में कलावा लपेटकर सावित्री और माता पार्वती की प्रतीक के रूप में रख लें।</li><li>इसके बाद चावल, हल्दी और पानी से मिक्स पेस्ट को हथेलियों में लगाकर सात बार बरगद में छापा लगाएं।</li><li>अब वट वृक्ष में जल अर्पित करें।</li><li>फिर फूल, सिंदूर, अक्षत, मिठाई, खरबूज सहित अन्य फल अर्पित करें।</li><li>फिर 14 आटा की पूड़ियों लें और हर एक पूड़ी में 2 भिगोए हुए चने और आटा-गुड़ के बने गुलगुले रख दें और इसे बरगद की जड़ में रख दें।</li><li>फिर जल अर्पित कर दें। और  दीपक और धूप जला दें।</li><li>फिर सफेद सूत का धागा या फिर सफेद नार्मल धागा, कलावा आदि लेकर वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए बांध दें।</li><li>5 से 7 या फिर अपनी श्रद्धा के अनुसार परिक्रमा कर लें। इसके बाद बचा हुआ धागा वहीं पर छोड़ दें।</li><li> इसके बाद हाथों में भिगोए हुए चना लेकर व्रत की कथा सुन लें। फिर इन चने को अर्पित कर दें।</li><li>फिर सुहागिन महिलाएं माता पार्वती और सावित्री के को चढ़ाए गए सिंदूर को तीन बार लेकर अपनी मांग में लगा लें।</li><li>अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें।</li><li>इसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोल सकती हैं।</li><li>व्रत खोलने के लिए बरगद के वृक्ष की एक कोपल और 7 चना लेकर पानी के साथ निगल लें।</li><li>इसके बाद आप प्रसाद के रूप में पूड़ियां, गुलगुले आदि खा सकती हैं।   </li></ul></li></ul>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b5%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%8b/">रखा है वट सावित्री व्रत ,तो सुहागिन महिलाएं बिल्कुल भी न करें गलतियां,जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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		<title>आज है शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 May 2022 04:15:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[आज है शुक्र प्रदोष व्रत]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इस समय ज्येष्ठ माह चल रहा है और इस माह के शुक्ल पक्ष का पहला प्रदोष व्रत 27 मई यानी आज है। आप सभी को बता दें कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। जी हाँ और यह व्रत महीने में दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष में तो</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b7-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a4%be/">आज है शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>इस समय ज्येष्ठ माह चल रहा है और इस माह के शुक्ल पक्ष का पहला प्रदोष व्रत 27 मई यानी आज है। आप सभी को बता दें कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। जी हाँ और यह व्रत महीने में दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष में तो एक कृष्ण पक्ष में। आपको बता दें कि प्रदोष व्रत जब सोमवार के दिन आता है तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। वहीं अगर प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन आता है तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है। ऐसे में आज शुक्रवार है तो इसी वजह से आज शुक्र प्रदोष व्रत है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://theblat.in/wp-content/uploads/2022/05/Shukra-Pradosh-300x225.jpg" alt="" class="wp-image-38731" width="640" height="480"/></figure></div>



<p><strong>प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p><strong>प्रारम्भ &#8211;</strong>&nbsp;27 मई 2022 सुबह 11 बजकर 47 मिनट</p>



<p><strong>समाप्त &#8211;</strong>&nbsp;28 मई 2022 दोपहर 1 बजकर 9 मिनट</p>



<p><strong>शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि</strong></p>



<ul class="wp-block-list"><li>जल्द उठकर स्नान आदि कर लें।</li><li>स्नान के बाद साफ-सुथरे सूखे वस्त्र धारण कर लें।</li><li>अगर आप व्रत रख रहे हैं तो भगवान शिव का स्नरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।</li><li>सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक करें</li><li>आप चाहे तो पंच तत्व (दूध, पानी, दही, शहद, गंगाजल) से भी अभिषेक कर सकते हैं</li><li>अब भोलेनाथ को फूल और माला, बेल पत्र, धतूरा आदि चढ़ाएं।</li><li>इसके बाद भगवान शिव को भोग लगाएं।</li><li>भोग लगाने के बाद जल अर्पित करें।</li><li>अब घी का दीपक और धूप जलाकर शिव चालीसा, शिव मंत्र का जाप करें।</li><li>अंत में आरती करके भूल चूक के लिए माफी मांग लें।</li><li>दिनभर व्रत रहने के बाद शाम को व्रत खोल लें।</li></ul>



<p><strong>शुक्र प्रदोष व्रत की कथा-&nbsp;</strong>स्कंद पुराण की कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा लेने जाती थी और संध्या को लौटती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी तो उसे नदी किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया जो विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर उसका राज्य हड़प लिया था। उसकी माता की मृत्यु भी अकाल हुई थी। ब्राह्मणी ने उस बालक को अपना लिया और उसका पालन-पोषण किया। कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों के साथ देवयोग से देव मंदिर गई। वहां उनकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को बताया कि जो बालक उन्हें मिला है वह विदर्भ देश के राजा का पुत्र है जो युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता को ग्राह ने अपना भोजन बना लिया था। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी।</p>



<p>ऋषि आज्ञा से दोनों बालकों ने भी प्रदोष व्रत करना शुरू किया। एक दिन दोनों बालक वन में घूम रहे थे तभी उन्हें कुछ गंधर्व कन्याएं नजर आई। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया किंतु राजकुमार धर्मगुप्त &#8216;अंशुमती&#8217; नाम की गंधर्व कन्या से बात करने लगे। गंधर्व कन्या और राजकुमार एक दूसरे पर मोहित हो गए। कन्या ने विवाह हेतु राजकुमार को अपने पिता से मिलवाने के लिए बुलाया। दूसरे दिन जब वह पुन: गंधर्व कन्या से मिलने आया तो गंधर्व कन्या के पिता ने बताया कि वह विदर्भ देश का राजकुमार है।</p>



<p>भगवान शिव की आज्ञा से गंधर्वराज ने अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार धर्मगुप्त से कराया। इसके बाद राजकुमार धर्मगुप्त ने गंधर्व सेना की सहायता से विदर्भ देश पर पुनः आधिपत्य प्राप्त किया। यह सब ब्राह्मणी और राजकुमार धर्मगुप्त के प्रदोष व्रत करने का फल था। स्कंदपुराण के अनुसार, जो भक्त प्रदोष व्रत के दिन शिवपूजा के बाद एकाग्र होकर प्रदोष व्रत कथा सुनता या पढ़ता है उसे सौ जन्मों तक कभी दरिद्रता नहीं होती।</p>
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