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	<title>जानिए विशेषज्ञों की राय Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>जाने वायुमंडल में घुलते जहर के कारण कैसे रूठ रहे हैं विदेशी मेहमान, प्रवासी पक्षियों की संख्‍या में आई कमी,जानिए विशेषज्ञों की राय </title>
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		<pubDate>Mon, 16 May 2022 06:27:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;ग्रीनमैन के नाम से मशहूर पर्यावरणविद विजय कुमार बघेल का प्रवासी पक्षियों को अब देश की आबोहवा कम रास आ रही है। इसके चलते देश में पक्षी विहारों में विदेशी मेहमानों की आवक कम हो रही है। प्रवासी पक्षियों की संख्‍या में कमी का एक प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। पर्यावरणविदों</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%9c/">जाने वायुमंडल में घुलते जहर के कारण कैसे रूठ रहे हैं विदेशी मेहमान, प्रवासी पक्षियों की संख्‍या में आई कमी,जानिए विशेषज्ञों की राय </a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>&nbsp;ग्रीनमैन के नाम से मशहूर पर्यावरणविद विजय कुमार बघेल का प्रवासी पक्षियों को अब देश की आबोहवा कम रास आ रही है। इसके चलते देश में पक्षी विहारों में विदेशी मेहमानों की आवक कम हो रही है। प्रवासी पक्षियों की संख्&#x200d;या में कमी का एक प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम में जबरदस्&#x200d;त बदलाव देखने को मिला है। उनका कहना है कि यदि प्रवासी पक्षियों के दीर्घकालिक कारणों पर बात करें तो जलवायु परिवर्तन इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://theblat.in/wp-content/uploads/2022/05/715515.jpg" alt="" class="wp-image-36019"/></figure></div>



<p>इनका कहना है कि ठंडे देशों से आने वाले इन प्रवासी पक्षियों को हिमालय से पहले ही अपनी मनचाही जलवायु मिल जा रही है, इसलिए वे यहां कम आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के चलते प्रवासी पक्षियों पर क्&#x200d;या असर पड़ रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है प्रवासी प्रजातियों में वे जानवर व पक्षी समूह शामिल हैं, जो भोजन, धूप, तापमान, जलवायु आदि जैसे विभिन्न कारकों के कारण वर्ष के अलग-अलग समय के दौरान एक आवास से दूसरे आवास में चले जाते हैं। आवासों के बीच आंदोलन कभी-कभी हजारों मील/किलोमीटर से अधिक हो सकता है। इस दौरान प्रवासी पक्षी सूर्य और सितारों से आकाशीय संकेतों, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और मानसिक मानचित्रों का उपयोग करके नेविगेट करते हैं।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/16052022/World%20Migratory%20Birds%20Day1.jpg" alt="jagran"/></figure></div>



<p><strong>2-&nbsp;</strong>उन्&#x200d;होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारक मानव है। मानव प्राकृतिक पर्यावरण को खतरे में डालने वाले संशोधनों और प्रवासी पक्षियों की इन प्रजातियों के आवासों को नष्ट कर देता है। प्रजनन के लिए उपयुक्त स्थानों को खोजने के लिए प्रवासी पक्षियों को यात्रा करने की जरूरत होती है। दुनिया भर में पक्षियों की 11,000 प्रजातियां हैं। इनमें से 1.800 ऐसी हैं, जिन्हें यात्रा करने की आवश्यकता है और इसलिए वे प्रवासी हैं।</p>



<p><strong>3-&nbsp;</strong>ग्रीनमैन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन बढ़ते तापमान और मौसम के आगे बढ़ने का कारण बनता है। यही कारण है कि इसने पक्षियों की कई प्रजातियों को अपने प्रवासी फेनोलाजी को बदलने के लिए मजबूर किया है। इसने उन्हें अपने प्रजनन क्षेत्रों, अन्य प्रजातियों को अपने सर्दियों के समय को बदलने के लिए और दूसरों को अपने प्रवास की अवधि को कम करने व बदलने के लिए मजबूर किया है। अंततः इस परिवर्तन से कई प्रवासी प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में है। हालांकि, प्रवासी पक्षियों के व्यवहार में परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इसके परिणाम स्पष्ट हैं। उन्&#x200d;होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पक्षियों की पूरी जैविक श्रृंखला को प्रभावित करता है, क्योंकि शिकार करने वाले पक्षियों को अपने शिकार के पैटर्न को बदलने के लिए भी मजबूर किया जाता है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/16052022/2World%20Migratory%20Birds%20Day.jpg" alt="jagran"/></figure></div>



<p><strong>4-&nbsp;</strong>उन्&#x200d;होंने कहा कि विविध प्रकार के वातावरण में भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव पाए जाते हैं। सभी जीव, अपने चारों ओर के वातावरण से प्रभावित होते हैं। ये जीव अपने वातावरण के साथ एक विशिष्ट तंत्र का निर्माण करते हैं। इसे पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं। जीवों और वातावरण के इस संबंध को ही पारिस्थितिकी कहा जाता है। पारिस्थितिकी तंत्र की चुंबकीय शक्ति प्रवासी पक्षियों को अपनी ओर खींचती है। उन्&#x200d;होंने कहा कि इसे समझने के लिए हम कल्पना करें एक तालाब में जहां मछलियां, मेंढ़क, शैवाल, जलीय पुष्प और अन्य कई जलीय जीव रहते हैं। ये सभी न केवल एक-दूसरे पर आश्रित हैं, अपितु जल, वायु, भूमि जैसे अजैविक घटकों के साथ भी पारस्परिक रूप से जुड़े हुए हैं। समुदाय का यह पूर्ण तंत्र, जिसमें अजैविक घटकों तथा जैविक घटकों का पारस्परिक संबंध ही पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करता है।</p>



<p><strong>5-</strong>&nbsp;पर्यावरणविद बेघल ने कहा कि भारत में प्रवास करने वाले महत्वपूर्ण पक्षियों में अमूर फाल्कन्स, बार हेडेड घी, काली गर्दन वाली क्रेन, समुद्री कछुए, डुगोंग, हंपबैक व्हेल आदि शामिल हैं। भारतीय उप-महाद्वीप प्रमुख पक्षी फ्लाईवे नेटवर्क, यानी मध्य एशियाई फ्लाइवे (सीएएफ) का भी हिस्सा है। यह आर्कटिक और हिंद महासागरों के बीच के क्षेत्रों को कवर करता है, और 182 प्रवासी जल पक्षी प्रजातियों की कम से कम 279 आबादी को कवर करता है, जिसमें 29 विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/16052022/3World%20Migratory%20Birds%20Day.jpg" alt="jagran"/></figure></div>



<p><strong>यह भी जानें</strong></p>



<p><strong>1-&nbsp;</strong>बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि दुनिया भर के पक्षी संकट में हैं। पक्षियों की लगभग 11,000 प्रजातियां हैं। इस अध्ययन में पाया गया कि उनमें से प्रत्येक 10 में से चार प्रजातियों की संख्या घट रही है। यह सभी प्रकार के आवासों में रहने वाले सभी प्रकार के पक्षियों के लिए सच है।</p>



<p><strong>2-</strong>&nbsp;कुछ पक्षी, जैसे लाल-मुर्गा कठफोड़वा और कैलिफोर्निया को कोंडोर गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। इन प्रजातियों के कुछ ही सदस्य जंगल में रहते हैं। आर्द्रभूमि में रहने वाली प्रजातियों की संख्&#x200d;या में वृद्धि हो रही है। हालांकि, अन्&#x200d;य आवासों में पक्षी संघर्ष कर रहे हैं। नद&#x200d;ियों के तटों, जंगलों से लेकर टूंड्रा तक पक्षियों की आबादी घट रही है। सबसे बड़ा परिवर्तन घास के मैदानों की प्रजातियों में होता है। खासकर इस सूची में गौरैया, ब्&#x200d;लैकबर्ड्स और लार्क्&#x200d;स शामिल हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि उनके आवास का 90 फीसद हिस्&#x200d;सा कृषि कार्य में उपयोग किया जा रहा है।</p>



<p><strong>3-</strong>&nbsp;प्रवासी जीवों के नवीनतम आंकड़ों में पक्षियों की हिस्सेदारी 83 फीसद है। COP-13 से पहले, प्रवासी पक्षी प्रजातियों की संख्या 378 थी और अब यह 380 तक पहुंच गई है। पक्षी वर्ग में मूसिकैपिडे से संबंधित प्रवासी प्रजातियों की संख्या सर्वाधिक है। प्रवासी पक्षियों की सर्वाधिक संख्या वाला दूसरा समूह राप्टर्स या एक्सीपीट्रिडे (Accipitridae) वर्ग के उल्लू, गिद्ध और चील जैसे शिकारी पक्षियों का है। बड़ी संख्या में प्रवास करने वाले पक्षियों का एक अन्य समूह वेडर (wader) या जलपक्षियों का है। भारत में इन प्रवासी पक्षी प्रजातियों की संख्या 41 है, इसके बाद ऐनाटीडे वर्ग से संबंधित बत्तखों का स्थान आता है जिनकी संख्या 38 हैं।</p>
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		<title>होम लोन पर लगने वाले यह शुल्क बढ़ा सकते हैं आपके कर्ज की लागत,जानिए विशेषज्ञों की राय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Nov 2021 06:42:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Biz & Expo]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए विशेषज्ञों की राय]]></category>
		<category><![CDATA[होम लोन पर लगने वाले यह शुल्क बढ़ा सकते हैं आपके कर्ज की लागत]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मौजूदा वक्त में कई सारे बैंक सस्ती ब्याज दर पर होम लोन दे रहे हैं। अगर, आप होम लोन ले रहे हैं तो आपको उस पर ब्याज की EMI के साथ आपको उस पर विभिन्न लागू शुल्कों का भुगतान करना पड़ता है। ये शुल्क सभी बैंकों, आवास वित्त कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों में अलग-अलग</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>मौजूदा वक्त में कई सारे बैंक सस्ती ब्याज दर पर होम लोन दे रहे हैं। अगर, आप होम लोन ले रहे हैं तो आपको उस पर ब्याज की EMI के साथ आपको उस पर विभिन्न लागू शुल्कों का भुगतान करना पड़ता है। ये शुल्क सभी बैंकों, आवास वित्त कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों में अलग-अलग होते हैं। आपको हम लोन लेते वक्त यह जरूर देख लेना चाहिए कि, उस पर कौन कौन से शुल्क लग रहे हैं। क्योंकि, होम लोन पर लगने वाले यह शुल्क होम लोन की लागत को बढ़ा देते हैं, जिससे आप पर लोन का अधिक बोझ भी पड़ सकता है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://choicetimes.org/wp-content/uploads/2021/11/home_loan_offer.jpg" alt="" class="wp-image-15038"/></figure></div>



<p>&#8220;टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन जी के अनुसार, होम लोन लेते वक्त हमें अलग अलग तरह की फीस का भुगतान करना पड़ सकता है। जैसे कि प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम फीस आदि। हम अपने बैंक से बात करके प्रोसेसिंग फीस को नेगोशिएट भी करा सकते हैं। साथ ही अगर आपको फिक्स रेट पर होम लोन मिल रहा है, तो आपको फ्लोटिंग रेट की बजाय फिक्स रेट पर होम लोन को वरियता देना चाहिए। क्योंकि, शुरुआती दौर में भले ही फिक्स रेट पर होम लोन की लागत आपको ज्यादा लगे, पर लंबी अवधि में यह आपको फ्लोटिंग रेट के होम लोन से ज्यादा फायदा देता है।&#8221;</p>



<p>हम आपको उन 11 तरह के शुल्कों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें होम लोन लेते वक्त आपको चुकाना पड़ सकता है। आपको बताते चलें कि, ऐसा जरूरी नहीं है कि होम लोन लेते वक्त आप पर यह सभी 11 शुल्क लगाए ही जाएं। लेकिन होम लोन लेते वक्त आपको इससे जुड़े सभी तरह के दस्तावेजों को बेहद ही ध्यान से पढ़ने की जरूरत है, जिससे आपको यह पता चल सके कि लोन लेते वक्त आपसे कौन सौन से शुल्क लिए जा रहे हैं।</p>



<p><strong>लॉग इन शुल्क</strong></p>



<p>इसे आवेदन शुल्क के नाम से भी जाना जाता है, यह लोन आवेदन का मूल्यांकन करने के लिए बैंक द्वारा लिया जाने वाला शुरुआती शुल्क है। इस स्तर पर बैंक यह आकलन करता है कि आवेदन में आगे की प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ सटीक जानकारी है या नहीं।</p>



<p><strong>प्रोसेसिंग शुल्क</strong></p>



<p>क्रेडिट अंडरराइटिंग प्रक्रिया के दौरान लोन आवेदन का मूल्यांकन कई मापदंडों पर किया जाता है जिसमें केवाईसी सत्यापन, वित्तीय मूल्यांकन, रोजगार सत्यापन, निवास और कार्यालय का सत्यापन, क्रेडिट हिस्ट्री मूल्यांकन आदि शामिल होता है। लोन देने वाली संस्था प्रोसेसिंग शुल्क के जरिए क्रेडिट हामीदारी प्रक्रिया से संबंधित सभी लागतों की वसूली करती है। कुछ लोन देने वाली संस्थाएं प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में एक समान शुल्क लेते हैं जबकि अन्य संस्थाएं आमतौर पर लोन की राशि के 2 फीसद तक का वैरिएबल प्रोसेसिंग फीस लेते हैं।</p>



<p><strong>टेक्निकल असेसमेंट फीस</strong></p>



<p>जिस संपत्ति के लिए होम लोन लिया गया है, उसके बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए लैंडर्स तकनीकी विशेषज्ञों को नियुक्त करते हैं। कई सारे लैंडर्स इस तरह के शुल्क को अपने प्रोसेसिंग शुल्क में शामिल करते हैं, वहीं कुछ लैंडर्स इसे अलग से चार्ज करते हैं।</p>



<p><strong>लीगल फीस</strong></p>



<p>कोई लैंडर लोन देते वक्त यह जरूर सुनिश्चित करना चाहता है कि, जिसके लिए वह लोन दे रहा है, उस संपत्ति पर कोई भी कानूनी विवाद ना हो। इसके लिए लैंडरों को कानूनी सलाहकारों की जरूरत पड़ती है। कई सारे लैंडर लोन लेने वाले लोगों से ही अपने कानूनी सलाहकारों की फीस चुकाने को बोलते हैं।</p>



<p id="rel5">&nbsp;</p>



<p><strong>फ्रैंकिंग फीस</strong></p>



<p>फ्रैंकिंग आपके होम लोन समझौते पर आम तौर पर एक मुहर लगाने की प्रक्रिया है, इस प्रकार यह पुष्टि करता है कि आपने आवश्यक स्टाम्प शुल्क भुगतान किया है। होम लोन समझौते की फ्रैंकिंग आमतौर पर सरकार द्वारा अधिकृत बैंकों या एजेंसियों द्वारा की जाती है। फ्रैंकिंग शुल्क आम तौर पर होम लोन मूल्य का 0.1 फीसद होता है।</p>



<p><strong>प्री EMI चार्ज</strong></p>



<p>होम लोन के मिलने के बाद यदि उधारकर्ता को घर का कब्जा मिलने में देरी होती है, तो लैंडर उनसे एक साधारण ब्याज लेता है जिसे प्री EMI कहा जाता है।</p>



<p><strong>रेगुलेटरी फीस</strong></p>



<p>यह शुल्क लैंडर्स की तरफ से होम लोन मिलने की प्रक्रिया में वैधानिक निकायों की ओर से लिए जाते हैं। यह शुल्क ज्यादातर विभिन्न शुल्कों पर स्टांप ड्यूटी और जीएसटी के रूप में होता है जो लैंडर्स द्वारा एकत्र किया जाता है और सरकार को भुगतान किया जाता है।</p>



<p><strong>रि-अप्रेजल फीस</strong></p>



<p>होम लोन आवेदन की मंजूरी सीमित वैधता अवधि के साथ आती है। यदि आपका लोन मंजूर हो गया है, लेकिन आप लंबी अवधि के लिए इसे नहीं लेते हैं, तो लैंडर आपके लोन आवेदन का पुनर्मूल्यांकन करेगा।</p>



<p><strong>इंश्योरेंस प्रीमियम</strong></p>



<p>कई सारे लैंडर उधारकर्ताओं से संपत्ति को किसी भी भौतिक क्षति से बचाने के लिए इंश्योरेंस लेने के लिए कहते हैं। अगर आप होम लोन लेते वक्त इंश्योरेंस लेते हैं तो आपको इसके प्रीमियम का भी भुगतान करना होगा।</p>



<p><strong>नोटरी फीस</strong></p>



<p>अगर आप NRI हैं और आप होम लोन लेना चाह रहे हैं तो आपको कुछ अन्य तरह के शुल्कों का भुगतान करना पड़ेगा। आपको अपनी केवाइसी और पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए भारतीय दूतावास में नोटरी शुल्क देना होगा।</p>



<p><strong>अधिनिर्णय शुल्क</strong></p>



<p>यदि आप एक NRI के पीओए धारक हैं, तो होम लोन आवेदन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आपको भारत में नोटरीकृत पीओए का न्यायनिर्णयन प्राप्त करने की आवश्यकता है। जिसके लिए आपको संबंधित शुल्क का भुगतान करना होगा।</p>
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