<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जानिए पौराणिक कथा Archives - Ad Event Media</title>
	<atom:link href="https://adeventmedia.com/tag/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://adeventmedia.com/tag/जानिए-पौराणिक-कथा/</link>
	<description>Know the world</description>
	<lastBuildDate>Sat, 15 Jan 2022 04:24:11 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2024/11/cropped-AEM-32x32.png</url>
	<title>जानिए पौराणिक कथा Archives - Ad Event Media</title>
	<link>https://adeventmedia.com/tag/जानिए-पौराणिक-कथा/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आखिर क्यों विष्णु जी के वाहन बने गरुड़, जानिए पौराणिक कथा</title>
		<link>https://adeventmedia.com/%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a5%81-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Jan 2022 04:24:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[आखिर क्यों विष्णु जी के वाहन बने गरुड़]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पौराणिक कथा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://adeventmedia.com/?p=53323</guid>

					<description><![CDATA[<p>हिन्दू धर्म में कई ऐसी कहानियां और किस्से हैं जो आप सभी ने सुने या पढ़े होंगे, हालाँकि कई ऐसे भी होंगे जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसा ही किस्सा जो आप शायद ही जानते होंगे. जी दरअसल यह किस्सा भगवान विष्णु से जुड़ा</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a5%81-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be/">आखिर क्यों विष्णु जी के वाहन बने गरुड़, जानिए पौराणिक कथा</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिन्दू धर्म में कई ऐसी कहानियां और किस्से हैं जो आप सभी ने सुने या पढ़े होंगे, हालाँकि कई ऐसे भी होंगे जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसा ही किस्सा जो आप शायद ही जानते होंगे. जी दरअसल यह किस्सा भगवान विष्णु से जुड़ा है. आप जानते ही होंगे वह गरुड़ की सवारी करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं क्यों? अगर नहीं जानते हैं तो आज हम आपको बताते हैं इसके पीछे का तर्क.</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="https://tosnews.com/wp-content/uploads/2022/01/VISHNU-1.jpg" alt="" class="wp-image-211529" width="589" height="308"/></figure></div>



<p><strong>पौराणिक कथा:</strong>&nbsp;पुराणों कथाओं के अनुसार गरूढ़ ने देवताओं से युद्ध करके उनसे अमृत कलश छीन लिया था। दरअसल, ऋषि कश्यप की कई पत्नियां थीं जिनमें से दो वनिता और कद्रू थी। ये दोनों ही बहने थी, जो एक दूसरे से ईर्ष्या रखती थी। दोनों के पुत्र नहीं थे तो पति कश्यप ने दोनों को पुत्र के लिए एक वरदान दे दिया। वनिता ने दो बलशाली पुत्र मांगे जबकि कद्रू ने हजार सर्प पुत्र रूप में मांगे जो कि अंडे के रूप में जन्म लेने वाले थे। सर्प होने के कारण कद्रू के हजार बेटे अंडे से उत्पन्न हुए और अपनी मां के कहे अनुसार काम करने लगे। दोनों बहनों में शर्त लग गई थी कि जिसके पुत्र बलशाली होंगे हारने वाले को उसकी दासता स्वीकार करनी होगी। इधर सर्प ने जो जन्म ले लिया था लेकिन वनिता के अंडों से अभी कोई पुत्र नहीं निकला था। इसी जल्दबाजी में वनिता ने एक अंडे को पकने से पहले ही फोड़ दिया। अंडे से अर्धविकसित बच्चा निकला जिसका ऊपर का शरीर तो इंसानों जैसा था लेकिन नीचे का शरीर अर्धपक्व था। इसका नाम अरुण था।</p>



<p>अरुण ने अपनी मां से कहा कि &#8216;पिता के कहने के बाद भी आपने धैर्य खो दिया और मेरे शरीर का विस्तार नहीं होने दिया। इसलिए मैं आपको श्राप देता हूं कि आपको अपना जीवन एक सेवक के तौर पर बिताना होगा। अगर दूसरे अंडे में से निकला उनका पुत्र उन्हें इस श्राप से मुक्त ना करवा सका तो वह आजीवन दासी बनकर रहेंगी।&#8217; भय से विनता ने दूसरा अंडा नहीं फोड़ा और पुत्र के शाप देने के कारण शर्त हार गई और अपनी छोटी बहन की दासी बनकर रहने लगी। बहुत लंबे काल के बाद दूसरा अंडा फूटा और उसमें से विशालकाय गरुड़ निकला जिसका मुख पक्षी की तरह और बाकी शरीर इंसानों की तरह था। हालांकि उनकी पसलियों से जुड़े उनके विशालकाय पंक्ष भी थे। जब गरुड़ को यह पता चला कि उनकी माता तो उनकी ही बहन की दासी है और क्यों है यह भी पता चला, तो उन्होंने अपनी मौसी और सर्पों से इस दासत्व से मुक्ति के लिए उन्होंने शर्त पूछी। सर्पो ने विनता की दासता की मुक्ति के लिए अमृत मंथन ने निकला अमृत मांग।</p>



<p>अमृत लेने के लिए गरुड़ स्वर्ग लोक की तरफ तुरंत निकल पड़े। देवताओं ने अमृत की सुरक्षा के लिए तीन चरणों की सुरक्षा कर रखी थी, पहले चरण में आग की बड़े परदे बिछा ररखे थे। दूसरे में घातक हथियारों की आपस में घर्षण करती दीवार थी और अंत में दो विषैले सर्पो का पहरा। वहां तक भी पहुंचाने से पहले देवताओं से मुकाबला करना था। गरुड़ सब से भीड़ गए और देवताओं को बिखेर दिया। तब गरुड़ ने कई नदियों का जल मुख में ले पहले चरण की आग को बुझा दिया, अगले पथ में गरुड़ ने अपना रूप इतना छोटा कर लिया के कोई भी हथियार उनका कुछ न बिगाड़ सका और सांपों को अपने दोनों पंजो में पकड़कर उन्होंने अपने मुंह से अमृत कलश उठा लिया और धरती की ओर चल पड़े।</p>



<p>लेकिन तभी रास्ते में भगवान विष्णु प्रकट हुए और गरुड़ के मुंह में अमृत कलश होने के बाद भी उसके प्रति मन में लालच न होने से खुश होकर गरुड़ को वरदान दिया की वो आजीवन अमर हो जाएंगे। तब गरुड़ ने भी भगवान को एक वरदान मांगने के लिए बोला तो भगवान ने उन्हें अपनी सवारी बनने का वरदान मांगा। इंद्र ने भी गरुड़ को वरदान दिया की वो सांपों को भोजन रूप में खा सकेगा इस पर गरुड़ ने भी अमृत सकुशल वापसी का वादा किया। अंत में गरुड़ ने सर्पों को अमृत सौंप दिया और भूमि पर रख कर कहा कि यह रहा अमृत कलश। मैंने यहां इसे लाने का अपना वादा पूरी किया और अब यह आपके सुपूर्द हुआ, लेकिन इसे पीने के आप सभी स्नान करें तो अच्छा होगा। जब वे सभी सर्प स्नान करने गए तभी वहां अचानक से भगवान इंद्र पहुंचे और अमृत कलश को वापस ले गए। लेकिन कुछ बूंदे भूमि पर गिर गई जो घांस पर ठहर गई थी। सर्प उन बूंदों पर झपट पड़े, लेकिन उनके हाथ कुछ न लगा। इस तरह गरुड़ की शर्त भी पूरी हो गई और सर्पों को अमृत भी नहीं मिला।</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a5%81-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be/">आखिर क्यों विष्णु जी के वाहन बने गरुड़, जानिए पौराणिक कथा</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: adeventmedia.com @ 2026-06-17 21:32:53 by W3 Total Cache
-->