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	<title>जरूर पढ़े यह कथा Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>18 मई को मनाई जाएगी गंगा सप्तमी, जरूर पढ़े यह कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 May 2021 05:44:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पौराणिक शास्त्रों के मुताबिक़ वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग लोक से शिवशंकर की जटाओं में पहुंची थी। इसी के चलते इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। आप सभी को बता दें कि इस साल गंगा सप्तमी का पर्व मंगलवार, 18 मई 2021 को मनाया जा रहा है।</p>
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<p>पौराणिक शास्त्रों के मुताबिक़ वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग लोक से शिवशंकर की जटाओं में पहुंची थी। इसी के चलते इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। आप सभी को बता दें कि इस साल गंगा सप्तमी का पर्व मंगलवार, 18 मई 2021 को मनाया जा रहा है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं माँ गंगा की कथा।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="737" height="414" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/05/gbn.png" alt="" class="wp-image-33327" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/05/gbn.png 737w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/05/gbn-300x169.png 300w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/05/gbn-150x84.png 150w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/05/gbn-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 737px) 100vw, 737px" /></figure>



<p><strong>कथा-</strong>&nbsp;भागीरथ एक प्रतापी राजा थे। उन्होंने अपने पूर्वजों को जीवन-मरण के दोष से मुक्त करने के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाने की ठानी। उन्होंने कठोर तपस्या आरम्भ की। गंगा उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं तथा स्वर्ग से पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हो गईं। पर उन्होंने भागीरथ से कहा कि यदि वे सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरेंगीं तो पृथ्वी उनका वेग सहन नहीं कर पाएगी और रसातल में चली जाएगी। यह सुनकर भागीरथ सोच में पड़ गए। गंगा को यह अभिमान था कि कोई उसका वेग सहन नहीं कर सकता। तब उन्होंने भगवान भोलेनाथ की उपासना शुरू कर दी। संसार के दुखों को हरने वाले शिव शम्भू प्रसन्न हुए और भागीरथ से वर मांगने को कहा। भागीरथ ने अपना सब मनोरथ उनसे कह दिया।</p>



<p>गंगा जैसे ही स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने लगीं गंगा का गर्व दूर करने के लिए शिव ने उन्हें जटाओं में कैद कर लिया। वह छटपटाने लगी और शिव से माफी मांगी। तब शिव ने उसे जटा से एक छोटे से पोखर में छोड़ दिया, जहां से गंगा सात धाराओं में प्रवाहित हुईं। इस प्रकार भगीरथ पृथ्वी पर गंगा का वरण करके भाग्यशाली हुए। उन्होंने जनमानस को अपने पुण्य से उपकृत कर दिया। युगों-युगों तक बहने वाली गंगा की धारा महाराज भगीरथ की कष्टमयी साधना की गाथा कहती है। गंगा प्राणीमात्र को जीवनदान ही नहीं देती, मुक्ति भी देती है।</p>
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		<title>7 फरवरी को है षटतिला एकादशी, जरूर पढ़े यह कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Feb 2021 03:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[7 फरवरी को है षटतिला एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी कहा जाता है। आपको बता दें कि इस साल षटतिला एकादशी 7 फरवरी 2021 को मनाई जाने वाली है। आप जानते ही होंगे षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। जी दरअसल इस व्रत में तिल का छ: रूप में दान</p>
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<p>माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी कहा जाता है। आपको बता दें कि इस साल षटतिला एकादशी 7 फरवरी 2021 को मनाई जाने वाली है। आप जानते ही होंगे षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। जी दरअसल इस व्रत में तिल का छ: रूप में दान करना उत्तम फलदायी माना जाता है। कहते हैं जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का दान करता है उसे उतने हज़ार वर्ष स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। इस दिन व्रत के दौरान जो लोग षटतिला एकादशी की कथा सुनते हैं उन्हें भी बहुत लाभ होते हैं। कहा जाता है कथा जरूर सुननी चाहिए। तो आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की कथा।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="540" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/fgfgfdgb.jpg" alt="" class="wp-image-24572" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/fgfgfdgb.jpg 650w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/fgfgfdgb-300x249.jpg 300w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2021/02/fgfgfdgb-150x125.jpg 150w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>षटतिला एकादशी की कथा-&nbsp;</strong>बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक ब्राह्मणी निवास करती थी। वह भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्त थी। वह भगवान विष्णु के सभी व्रतों को नियम से करती थी। ऐसे ही एक बार उसने 1 महीने तक व्रत और उपवास रखा। इसकी वजह से शरीर दुर्बल हो गया, लेकिन तन शुद्ध हो गया। अपने भक्त को देखकर भगवान ने सोचा कि तन शुद्धि से इसे बैकुंठ तो प्राप्त हो जाएगा, लेकिन उसका मन तृप्त नहीं होगा। उसने एक गलती की थी कि व्रत के समय कभी भी किसी को कोई दान नहीं दिया था। इस वजह से उसे विष्णुलोक में तृप्ति नहीं मिलेगी। तब भगवान स्वयं उससे दान लेने के लिए उसके घर पर गए। वे उस ब्राह्मणी के घर भिक्षा लेने गए, तो उसने भगवान विष्णु को दान में मिट्टा का एक पिंड दे दिया। श्रीहरि वहां से चले आए। कुछ समय बाद ब्राह्मणी का निधन हो गया और वह विष्णुलोक पहुंच गई। उसे वहां पर रहने के लिए एक कुटिया मिली, जिसमें कुछ भी नहीं था सिवाय एक आम के पेड़ के। उसने पूछा कि इतना व्रत करने का क्या लाभ?</p>



<p>उसे यहां पर खाली कुटिया और आम का पेड़ मिला। तब श्रीहरि ने कहा कि तुमने मनुष्य जीवन में कभी भी अन्न या धन का दान नहीं दिया। य​ह उसी का परिणाम है। यह सुनकर उसे पश्चाताप होने लगा, उसने प्रभु से इसका उपाय पूछा। तब भगवान विष्णु ने कहा कि जब देव कन्याएं तुमसे मिलने आएं, तो तुम उनसे षटतिला एकादशी व्रत करने की विधि पूछना। जब तक वे इसके बारे में बता न दें, तब तक तुम कुटिया का द्वार मत खोलना। भगवान विष्णु के बताए अनुसार ही उस ब्राह्मणी ने किया। देव कन्याओं से विधि जानने के बाद उसने भी षटतिला एकादशी व्रत किया। उस व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया सभी आवश्यक वस्तुओं, धन-धान्य आदि से भर गई। वह भी रुपवती हो गई। भगवान विष्णु ने नारद जी को षटतिला एकादशी व्रत की महिमा इस प्रकार सुनाई। षटतिला एकादशी के दिन तिल का दान करने से सौभाग्य बढ़ता है और दरिद्रता दूर होती है।</p>
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