अब विदेशी इंटरनेट भारतीय डाटा को नहीं भेज पाएंगे विदेश Archives - Ad Event Media https://adeventmedia.com/tag/अब-विदेशी-इंटरनेट-भारतीय/ Know the world Fri, 17 Dec 2021 05:36:57 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2024/11/cropped-AEM-32x32.png अब विदेशी इंटरनेट भारतीय डाटा को नहीं भेज पाएंगे विदेश Archives - Ad Event Media https://adeventmedia.com/tag/अब-विदेशी-इंटरनेट-भारतीय/ 32 32 अब विदेशी इंटरनेट भारतीय डाटा को नहीं भेज पाएंगे विदेश,डाटा सुरक्षा विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने की सिफारिश https://adeventmedia.com/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af/ Fri, 17 Dec 2021 05:36:55 +0000 https://adeventmedia.com/?p=50960 सरकार सिर्फ निजी डाटा ही नहीं, गैर निजी डाटा की भी सुरक्षा करेगी। वहीं विदेशी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म भारतीय डाटा को विदेश भी नहीं भेज पाएंगे। ऐसा करने पर उन्हें 15 करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। जो संवेदनशील डाटा किसी तरीके से विदेश जा चुका है, उनकी कापी भारत लाने की

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सरकार सिर्फ निजी डाटा ही नहीं, गैर निजी डाटा की भी सुरक्षा करेगी। वहीं विदेशी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म भारतीय डाटा को विदेश भी नहीं भेज पाएंगे। ऐसा करने पर उन्हें 15 करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। जो संवेदनशील डाटा किसी तरीके से विदेश जा चुका है, उनकी कापी भारत लाने की कवायद भी की जाएगी ताकि सरकार उससे वाकिफ रहे। पिछले तीन साल से लंबित डाटा सुरक्षा विधेयक को संसद से पारित होने के दो साल में चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू किया जा सकता है।

डीपीए का होगा गठन

नियामक के रूप में डाटा प्रोटेक्शन अथारिटी (डीपीए) का गठन किया जाएगा। ये सारी सिफारिशें निजी डाटा सुरक्षा विधेयक पर 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने की हैं। गुरुवार को समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप दी। दो साल पहले 11 दिसंबर, 2019 को निजी डाटा सुरक्षा विधेयक, 2019 संसद में पेश किया गया था और उसके बाद ही विधेयक को जेपीसी को सौंप दिया गया था।

गैर निजी डाटा की भी होगी सुरक्षा

समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि यह विधेयक सिर्फ निजी डाटा का नहीं, बल्कि गैर निजी डाटा की भी सुरक्षा करेगा इसलिए इसका नाम डाटा सुरक्षा विधेयक, 2021 होगा और कानून बनने पर यह डाटा सुरक्षा कानून कहलाएगा। समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि इस विधेयक को चरणबद्ध तरीके से 24 महीनों में पूरी तरह लागू किया जा सकता है।

इसलिए महसूस की जा रही जरूरत

डाटा सुरक्षा कानून की जल्द जरूरत इसलिए भी है क्योंकि फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म कई बार कह चुके हैं कि भारत में डाटा सुरक्षा कानून ही नहीं है तो वे किसका पालन करें। जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इस बिल को नए तरीके से संसद से पारित कराना होगा जो अब अगले सत्र में ही संभव दिख रहा है।

जेपीसी की प्रमुख सिफारिशें

निजी एवं गैर निजी डाटा का इस्तेमाल करने वाले प्लेटफार्मों या संस्थाओं को उनकी तरफ से डाटा सुरक्षा उल्लंघन का पूरा ब्योरा रखना होगा और नियामक को समय-समय पर सूचित करना होगा। बच्चों के डाटा का इस्तेमाल करने वाले प्लेटफार्म को डाटा प्रोटेक्शन अथारिटी में खुद को रजिस्टर करना होगा। अगर इंटरनेट मीडिया कंपनी का भारत में कार्यालय नहीं है तो उसे यहां संचालन की इजाजत नहीं होगी।

स्वदेशी नेटवर्क विकसित करने की जरूरत

इंटमीडिएरीज को छोड़कर सभी इंटरनेट मीडिया को उनके प्लेटफार्म पर डाली गई सामग्री के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की तरह स्वदेशी नेटवर्क विकसित करने की जरूरत है ताकि निजता की सुरक्षा के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिल सके।

लेना होगा सर्टिफिकेट

देश में इस्तेमाल होने वाले सभी डिजिटल उपकरणों को यह सर्टिफिकेट लेना होगा कि उनके उपकरण से डाटा सुरक्षा का उल्लंघन नहीं होगा, सरकार को इस काम के लिए एक तंत्र तैयार करना होगा। जो संवेदनशील डाटा देश से बाहर जा चुका है, उनकी कापी एक तय समय में मंगाने की व्यवस्था सरकार को करनी होगी।

नियुक्त करना होगा डाटा सुरक्षा अधिकारी

केंद्र सरकार को डाटा स्थानीयकरण की प्रणाली तैयार करनी चाहिए ताकि उसकी मदद से स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन हो सके। सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म को डाटा सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करना होगा। डाटा सुरक्षा के उल्लंघन के खिलाफ शिकायत, क्षतिपूर्ति व जुर्माने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था हो।

व्यापक संहिता बनाने की जरूरत

पत्रकारिता के नाम पर निजता की सुरक्षा में सेंध नहीं लगाई जा सकती और इस पर लगाम लगाने के लिए व्यापक संहिता बनाने की जरूरत। डाटा सुरक्षा कानून के उल्लंघन पर पांच करोड़ तक का जुर्माना या उस कंपनी के वैश्विक आधार पर कुल कारोबार का दो प्रतिशत, लेकिन भारत के बाहर निजी डाटा भेजने पर 15 करोड़ तक का जुर्माना किया जा सकता है। 

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